281 CRPF जवानों की आत्महत्या पर NHRC का संज्ञान: डॉ. एंथनी राजू ने उठाए गंभीर सवाल — “देश की रक्षा करने वाले जवानों के जीवन की रक्षा कौन करेगा?”
नई दिल्ली, 16 अगस्त 2026:
पिछले पांच वर्षों में 281 CRPF personnel की आत्महत्या से हुई मौतों के मामले ने देश को गंभीर चिंता में डाल दिया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने 14 अगस्त 2026 को इस मामले का सुओ मोटू संज्ञान लेते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय के गृह सचिव तथा CRPF के महानिदेशक को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने को कहा है।
NHRC के अनुसार, मीडिया रिपोर्ट में उपलब्ध CRPF के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि वर्ष 2021 में 57, 2022 में 43, 2023 में 57, 2024 में 46 और 2025 में 59 CRPF personnel की आत्महत्या से मृत्यु हुई। वर्ष 2025 में दर्ज 59 मामले पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक बताए गए हैं। जनवरी से 22 मई 2026 के बीच भी 19 CRPF personnel की आत्महत्या से मृत्यु की सूचना दी गई।
इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए Dr. Anthony Raju, Advocate, Supreme Court of India और Chairman, All India Council of Human Rights, Liberties and Social Justice (AICHLS) ने कहा कि यह विषय केवल आंकड़ों का नहीं बल्कि मानव जीवन, गरिमा, मानसिक स्वास्थ्य और राज्य की जवाबदेही का प्रश्न है।
“281 जवान केवल आंकड़े नहीं हैं”
Dr. Anthony Raju ने कहा:
«“जब एक जवान देश की सुरक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित करता है, तो उसके जीवन, सम्मान और मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करना भी व्यवस्था की जिम्मेदारी है। 281 मौतों को केवल आंकड़े मानकर आगे नहीं बढ़ा जा सकता। हमें यह जानना होगा कि इन त्रासदियों के पीछे वास्तविक कारण क्या थे।”»
उन्होंने कहा कि प्रत्येक मामले की निष्पक्ष और संवेदनशील समीक्षा आवश्यक है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या ड्यूटी का दबाव, लंबे समय तक deployment, परिवार से दूरी, छुट्टी की उपलब्धता, transfer/posting से जुड़ा तनाव, कार्यस्थल का वातावरण या अन्य व्यक्तिगत एवं संस्थागत परिस्थितियां किसी मामले में भूमिका निभा रही थीं।
NHRC की कार्रवाई महत्वपूर्ण शुरुआत
Dr. Anthony Raju ने NHRC द्वारा स्वतः संज्ञान लिए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि आयोग की कार्रवाई इस गंभीर विषय पर institutional accountability और preventive reforms की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।
उन्होंने कहा कि केवल रिपोर्ट मंगाना पर्याप्त नहीं होना चाहिए। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी जिससे भविष्य में किसी जवान को अत्यधिक मानसिक या भावनात्मक संकट की स्थिति में अकेला न छोड़ दिया जाए।
क्या होना चाहिए अगला कदम?
Dr. Anthony Raju ने निम्नलिखित उपायों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की:
- पिछले पांच वर्षों में हुई सभी 281 मौतों की comprehensive case-by-case review।
- प्रत्येक मामले में duty conditions और संबंधित परिस्थितियों की स्वतंत्र समीक्षा।
- जवानों के लिए confidential grievance redressal mechanism को मजबूत करना।
- समय पर professional psychological और counselling support उपलब्ध कराना।
- परिवार से संबंधित तनाव और welfare concerns के लिए प्रभावी institutional support।
- छुट्टी, transfer/posting और prolonged deployment से जुड़े संभावित stress factors की समीक्षा।
- प्रभावित परिवारों के लिए उचित welfare और rehabilitation support।
- भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए measurable institutional reforms।
- मानसिक स्वास्थ्य को personnel welfare और organisational policy का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना।
“आरोप नहीं, सच्चाई और समाधान चाहिए”
Dr. Anthony Raju ने स्पष्ट किया कि किसी भी अधिकारी या संस्था पर बिना जांच आरोप लगाना उचित नहीं होगा।
उन्होंने कहा:
«“यह समय आरोप लगाने का नहीं, बल्कि सच्चाई जानने का है। प्रत्येक मौत के पीछे की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि कहीं प्रणालीगत कमी सामने आती है तो जवाबदेही तय होनी चाहिए और यदि कहीं सुधार की आवश्यकता है तो तत्काल सुधार किया जाना चाहिए।”»
उन्होंने आगे कहा:
«“281 जवान, 281 परिवार और 281 अधूरी कहानियां — इन मौतों को केवल आंकड़ों में सीमित नहीं किया जा सकता। सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि हम अगली जान कैसे बचा सकते हैं।”»
उन्होंने केंद्र सरकार, CRPF leadership और संबंधित संस्थाओं से अपील की कि इस विषय को मानवाधिकार, personnel welfare और national security के संयुक्त दृष्टिकोण से देखा जाए।
Dr. Anthony Raju ने कहा कि देश की सुरक्षा करने वाले जवानों की सुरक्षा केवल हथियार, प्रशिक्षण और operational preparedness तक सीमित नहीं हो सकती। उनका जीवन, मानसिक स्वास्थ्य, सम्मान और परिवार भी राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
— Dr. Anthony Raju
Advocate, Supreme Court of India
Chairman, All India Council of Human Rights, Liberties and Social Justice (AICHLS)
Source: National Human Rights Commission (NHRC), Press Release dated 14 August 2026.
Disclaimer: यह समाचार/वक्तव्य NHRC द्वारा जारी सार्वजनिक जानकारी एवं उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, अधिकारी या संस्था पर बिना जांच आरोप लगाना नहीं है। किसी भी मामले के अंतिम निष्कर्ष सक्षम प्राधिकारी की निष्पक्ष जांच एवं विधिक प्रक्रिया के अधीन होंगे.