मानवाधिकार परिषद ने कालकाजी मंदिर के निकट कथित यौन उत्पीड़न की घटना पर चिंता जताई; महिलाओं की सुर



प्रेस विज्ञप्ति

मानवाधिकार परिषद ने कालकाजी मंदिर के निकट कथित यौन उत्पीड़न की घटना पर चिंता जताई; महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग

नई दिल्ली | 23 सितंबर 2026

ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ ह्यूमन राइट्स, लिबर्टीज एंड सोशल जस्टिस (AICHLS) ने नई दिल्ली के कालकाजी मंदिर के निकट आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की के कथित यौन उत्पीड़न से संबंधित मीडिया रिपोर्टों पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तीन व्यक्तियों ने कथित रूप से स्वयं को पुलिसकर्मी बताकर एक नाबालिग लड़की और उसके पुरुष साथी को धमकाया तथा उसके बाद कथित रूप से लड़की के साथ यौन उत्पीड़न किया। रिपोर्टों के अनुसार, मामले में कथित आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) की संबंधित धाराओं के तहत जांच की जा रही है।

डॉ. एंथनी राजू, अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय एवं अध्यक्ष, ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ ह्यूमन राइट्स, लिबर्टीज एंड सोशल जस्टिस (AICHLS) ने कहा:

“महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, गरिमा और सम्मान राज्य तथा समाज की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। किसी बच्चे के विरुद्ध यौन हिंसा का कोई भी आरोप अत्यंत गंभीर विषय है और इसकी त्वरित, निष्पक्ष तथा कानून के अनुरूप पेशेवर जांच आवश्यक है।”

AICHLS संबंधित अधिकारियों से निम्नलिखित सुनिश्चित करने की अपील करता है:

  • त्वरित, निष्पक्ष और कानूनसम्मत जांच सुनिश्चित की जाए;

  • घटनास्थल तथा आसपास के क्षेत्र के CCTV फुटेज, डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित कर उनकी जांच की जाए;

  • नाबालिग की पहचान, निजता और गरिमा की पूर्ण सुरक्षा की जाए;

  • प्रभावित बच्ची और उसके परिवार को आवश्यक सुरक्षा, परामर्श एवं सहायता उपलब्ध कराई जाए;

  • संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों पर पुलिस गश्त, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, CCTV निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए; तथा

  • कानून और न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

महिलाओं की सुरक्षा का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए

डॉ. एंथनी राजू ने आगे कहा:

“महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप या राजनीतिक टकराव का विषय नहीं बननी चाहिए। तत्काल प्राथमिकता पीड़िता की सुरक्षा और गरिमा, निष्पक्ष जांच, कानून के अनुसार जवाबदेही तथा प्रभावी निवारक उपाय होने चाहिए, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।”

AICHLS मीडिया, राजनीतिक प्रतिनिधियों और आम जनता से भी अपील करता है कि वे जिम्मेदारी और संयम बरतें, विशेषकर नाबालिग की पहचान, निजता और चल रही जांच से संबंधित किसी भी जानकारी को सार्वजनिक करने के संबंध में।

संगठन यह स्पष्ट करता है कि किसी भी आरोप की निष्पक्ष जांच आवश्यक है तथा किसी भी आरोपी की दोषसिद्धि अथवा निर्दोषता का अंतिम निर्धारण सक्षम न्यायालय द्वारा विधि सम्मत रूप से प्रस्तुत और स्वीकार्य साक्ष्यों तथा उचित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

डॉ. एंथनी राजू
अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय, भारत
अध्यक्ष
ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ ह्यूमन राइट्स, लिबर्टीज एंड सोशल जस्टिस (AICHLS)

मीडिया अस्वीकरण

यह प्रेस वक्तव्य संबंधित घटना के बारे में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के आधार पर जारी किया गया है। रिपोर्ट में उल्लिखित आरोपों को स्थापित तथ्य अथवा दोषसिद्धि का निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। प्रत्येक आरोपी को तब तक निर्दोष माना जाता है जब तक कि सक्षम न्यायालय द्वारा कानून के अनुसार दोष सिद्ध न कर दिया जाए। यह वक्तव्य केवल महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के संबंध में चिंता व्यक्त करने के उद्देश्य से जारी किया गया है और इसका उद्देश्य किसी जांच अथवा न्यायिक कार्यवाही को प्रभावित करना नहीं है।

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