यदि POCSO Act के अंतर्गत शिकायत देने के बाद भी पुलिस FIR दर्ज नहीं करती, तो यह ग़ैर-कानूनी और असंवैधानिक है। ऐसे में तुरंत कानूनी कदम उठाना आवश्यक है।
POCSO Act की धारा 19 के अनुसार सूचना मिलते ही FIR दर्ज करना अनिवार्य है।
दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 154 (अब BNSS 2023 की धारा 173) के तहत संज्ञेय अपराध में FIR दर्ज करना अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट ने Lalita Kumari v. Government of Uttar Pradesh में स्पष्ट कहा है:
संज्ञेय अपराध में FIR दर्ज करना अनिवार्य है।
प्रारम्भिक जांच (Preliminary Inquiry) की आवश्यकता नहीं है।
SHO को लिखित शिकायत दें।
प्राप्ति रसीद (डायरी नंबर/मुहर) अवश्य लें।
स्पष्ट लिखें कि मामला POCSO Act के तहत आता है।
CrPC की धारा 154(3) के तहत:
शिकायत की प्रति SP को रजिस्टर्ड पोस्ट / ईमेल से भेजें।
पोस्टल रसीद सुरक्षित रखें।
यदि फिर भी FIR दर्ज न हो:
न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रार्थना पत्र दाखिल करें।
FIR दर्ज करने व जांच के आदेश की मांग करें।
पहले दी गई शिकायतों की प्रतियां संलग्न करें।
⚡ यह बहुत प्रभावी कानूनी उपाय है।
यदि मामला अत्यंत गंभीर हो:
उच्च न्यायालय में Article 226 के तहत रिट याचिका दायर की जा सकती है।
POCSO मामलों में पुलिस अधिकारी FIR दर्ज न करे तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई संभव है।
बच्चे के बयान की रिकॉर्डिंग महिला अधिकारी द्वारा और संवेदनशील तरीके से की जानी चाहिए।
मेडिकल परीक्षण में देरी नहीं होनी चाहिए।
“POCSO केस में FIR से इनकार करना कानून का उल्लंघन है। चुप मत रहिए — न्याय के लिए कानूनी रास्ता अपनाइए।”
⚖️ यह जानकारी सामान्य कानूनी जागरूकता हेतु है। प्रत्येक मामले के तथ्य अलग होते हैं — उचित कानूनी सलाह अवश्य लें।
Disclaimer
यह सामग्री केवल सामान्य कानूनी जागरूकता (Legal Awareness) के उद्देश्य से तैयार की गई है।
यह किसी भी प्रकार से व्यक्तिगत कानूनी सलाह (Legal Advice) नहीं है और न ही यह किसी वकील-मुवक्किल (Advocate-Client) संबंध का निर्माण करती है।
प्रत्येक मामला अपने तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर भिन्न होता है। किसी भी कानूनी कार्यवाही से पूर्व संबंधित दस्तावेजों और परिस्थितियों की समीक्षा कर योग्य अधिवक्ता से व्यक्तिगत परामर्श लेना आवश्यक है।
POCSO जैसे संवेदनशील मामलों में पीड़ित की पहचान की गोपनीयता कानून द्वारा संरक्षित है। कृपया किसी भी प्रकार से पीड़ित/बालक की पहचान सार्वजनिक न करें।
यह जानकारी उपलब्ध कानूनों के सामान्य सिद्धांतों पर आधारित है और समय-समय पर विधायी संशोधनों या न्यायालयीन निर्णयों के अनुसार परिवर्तित हो सकती है।
न्याय के लिए जागरूक बनें — परंतु हर कदम कानूनी मार्गदर्शन में उठाएँ। ⚖️